महात्मा गांधी पर निबंध – जानिए देश के बापू का जीवन परिचय

महात्मा गांधी को आज देश का हर व्यक्ति जानता है। भारत देश ने इन्हे राष्ट्रपिता (फादर ऑफ नेशन) की उपाधि से नवाजा है। आज के लेख में हम आपको महात्मा गांधी पर निबंध बताएँगे। 

महात्मा गांधी पर निबंध, Mahatma Gandhi Essay in Hindi

महात्मा गांधी जीवन परिचय

देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक बहुत ही महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने सदैव लोगो को अहिंसा का पाठ पढ़ाया। देश को आजादी दिलाने में उनका बहुत बड़ा योगदान था।

महात्मा गांधी एक अच्छे राजनितिक होने के साथ साथ एक कुशल वक्ता भी थे। चलिए जानते है उनके जीवन के बारे में विस्तार से:- 


महात्मा गांधी का जन्म 

महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में  दिनांक 2 अक्टूबर 1867 कोहुआ था। महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद गांधी था और माता पुतलीबाई थी। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर में दीवान हुआ करते थे।

उनकी माता आस्था में बहुत विश्वास रखती थी। जिसका प्रभाव महात्मा गांधी के जीवन पर भी पड़ा। मात्र तेरह साल की उम्र में उनका विवाह कस्तूरबा नामक कन्या से हुआ। 


महात्मा गांधी का शिक्षण 

महात्मा गांधी की शुरू की पढ़ाई पोरबंदर में ही हुयी। हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए उन्हें राजकोट भेजा गया। अहमदाबाद से उन्होंने मेट्रिक की परीक्षा पास की। विदेश में उन्होंने लन्दन से वकालत की पढ़ाई की। 1890 में वह वकील बनकर भारत लौटे। 

शिक्षा के लिए उन्होंने विशेष योगदान भी दिया था। उन्होंने अपनी मातृभाषा के लिए बहुत जोर दिया। उनका कहना था की शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चो के मानवीय विकास के लिए शिक्षा का होना बहुत जरुरी है।


राष्ट्र पिता की उपाधि से सम्मानित 

आपको बता दे की पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने एक पत्र द्वारा उन्हें फादर ऑफ नेशन यानि की राष्ट्र पिता कहा। उसके बाद से लोग उन्हें राष्ट्र पिता के नाम से भी जानने लगे।


राजनीतिक नेता बनने का सफर 

महात्मा गांधी का स्वाभाव बचपन से भी बहुत शांत और सरल प्रवति का था। लन्दन से जब वह वकील बनकर आये तो दादा अब्दुल्ला एंड कंपनी द्वारा उन्हें मुकदमे के लिए दक्षिण अफ्रीका भेजा गया। तब उन्होंने देखा कि भारतीयों को बहुत भेदभाव का सहना पड़ता है।

उन्हें समाज में पीड़ित किया जाता है। एक बार तो महात्मा गांधी को ट्रेन के डब्बे से इसलिए बाहर निकाल दिया गया था क्यूंकि वह गोरे नहीं थे। उन्हें प्रथम दर्जे के डब्बे में जाने की अनुमति नहीं थी। 

इस घटना ने गांधी को अंदर से झकझोर कर रख दिया और उन्होंने अपने अधिकारों के लिए लड़ने का फैसला किया। दक्षिण अफ्रीका में रहकर उन्होंने भारतीयों को वोट न मिलने वाले बिल का भारी विरोध किया।

वह दक्षिण अफ्रीका में 21 साल की उम्र तक रहे। वहां पर उन्होंने भारतीयों पर हो रहे अत्याचार के लिए लड़ाई भी लड़ी। इस तरह वह एक महान राजनितिक नेता बनकर सबके सामने आये। 


महात्मा गांधी के आंदोलन

महात्मा गांधी ने देश को आजाद कराने के लिए कई लड़ाईयां लडी। उनके द्वारा कुछ प्रचलित आंदोलन निम्न है –

  • नमक आंदोलन 
  • असहयोग आंदोलन
  • भारत छोड़ो आंदोलन
  • चंपारण सत्याग्रह
  • दलित आंदोलन 

नमक आंदोलन 

यह आंदोलन 12 मार्च 1930 को शुरू किया गया था जो की चौबीस दिनों तक चला था। नमक आंदोलन साबरमती आश्रम से दांडी नामक गांव तक चलाया गया था इसलिए इसे दांडी आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। 

यह नमक पर ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए एकाधिकार को ख़त्म करने के लिए किया गया था। यह आंदोलन बहुत ही प्रभावशाली आंदोलनों में से एक था। महात्मा गांधी का कहना था कि नमक ऐसी चीज है

जिस पर सभी प्राणियों का सामान अधिकार होना चलिए। इस आंदोलन के चलते यह समझौता हुआ की समुद्र के किनारे रह रहे लोगो को नमक निर्माण में छूट मिलेगी। 


असहयोग आंदोलन

1 अगस्त 1920 को गांधी जी ने असहयोग आंदोलन की शुरआत की थी। जलियावाला बाग़ हत्याकांड से उनका दिल आहात हो गया था।

उन्हें यह भी लगने लगा था ही अंग्रेज सरकार इस घटना के विषय में उचित न्याय नहीं करेगी। इस लिए उन्होंने असहयोग आंदोलन का सहारा लिया। 

इसमें विदेशी कपड़ो का बहिष्कार किया गया और कई विदेशी कपड़ो को जलाया गया। इतना ही नहीं विदेशी वस्तुओं का भी बहिष्कार किया गया।  इस आंदोलन को लाखो लोगो का सहयोग प्राप्त हुआ जिसे देखकर अंग्रेज सरकार हिल गयी।


भारत छोड़ो आंदोलन

8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने भारत को आजाद कराने और अंग्रेजी सरकार को देश छोड़ने के लिए यह आंदोलन शुरू किया था। गांधी जी ने यह आंदोलन अखिल भारतीय कांग्रेस के मुम्बई अधिवेशन द्वारा प्रारम्भ किया था। 

भारत छोडो आंदोलन में महत्मा गांधी ने करो या मरो का नारा दिया था जो काफी प्रचलित हुआ। उन्होंने कहा की हम भारत को आजाद कराने के लिए अपने प्राण दांव पर भी लगा देंगे।

इस आंदोलन के जरिये भारतीयों पर हो रहे दुर्व्यवहार का विरोध किया गया। अंग्रेज सरकार द्वारा संचालित सरकारी दफ्तरों का बहिष्कार किया गया। इस आंदोलन में बड़े स्तर पर लोगो ने विरोध जताया था। 


चंपारण सत्याग्रह

1917 में गांधी जी ने इस आंदोलन को शुरू किया। यह विहार के चम्पारण जिले से शुरू किया गया था इसलिए इसका नाम चंपारण सत्याग्रह पड़ा। 

गरीब किसानो पर ब्रिटिश ज़मींदार अत्यधिक जुल्म कर रहे थे वह उनसे जबरजस्ती नील की खेती करा रहे थे। किसानो की स्थिति गंभीर होती जा रही थी उन्हें भूखे रहना पड़ रहा था

जिसके चलते कई किसानो की जाने चली गयी। इस स्थिति को देखते हुए गांधी जी ने चंपारण सत्याग्रह की शुरुआत की। इस आंदोलन में पहली बार देश को भारी जीत हासिल हुयी थी। 


दलित आंदोलन 

मुम्बई में 19 मई 1931 को अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग को स्थापित किया गया।  8 मई 1933 में छुआछूत विरोधी आंदोलन प्रारम्भ किया गया। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य दलितों के साथ हो रहे छुआछूत के व्यव्हार को मिटाना था। 

इसी तरह महात्मा गांधी ने देश की स्थिति को सुधारने के लिए कई आंदोलन किये जैसे खेड़ा आंदोलन, रॉलेट ऐक्ट को विरोध आदि।

इसमें से कई आंदोलनों में गांधी जी को विजय भी प्राप्त हुयी। महात्मा गांधी ने देश को आजाद कराने के लिए अपने जीवन काल में कई चुनोतियो का सामना किया। 

दिल्ली के बिड़ला भवन में 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी। इस घटना में सात अन्य लोगो को भी दोषी करार दिया गया। इस तरह देश के एक महान स्वतंत्रता सेनानी के जीवन का अंत हुआ।


यह भी पढ़ें : 

आपको पता है दुनिया के सात अजूबे कौन से हैं

जल प्रदूषण : समाधान, कारण तथा दुष्परिणाम

Leave a Comment