होली पर निबंध कक्षा 5 से 12 तक के लिए

इस लेख में हमने होली पर निबंध को कुछ इस तरह से लिखा है कि यह सभी कक्षाओं के छात्रों के प्रयोग में आ सके इसको शुद्ध और सरल हिंदी भाषा में बड़े ही आसान शब्दों में हमने इस लेख के माध्यम से प्रदान किया है

इस निबंध को सभी कक्षाओं के छात्रों के लिए लिखा गया है आप कोई भी कक्षा में क्यों ना हो अगर आप इस निबंध को लिखते हैं तो आपको अच्छे अंक जरूर प्राप्त होंगे

Holi par nibandh

होली पर निबंध 600 शब्दों में

होली हिंदुओं का पवित्र धार्मिक त्योहार है होली हिन्दु धम् के प्रमुख त्योहारों में से एक त्यौहार है जो रंगों के लिए प्रसिद्ध है होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस त्यौहार को भारत के साथ-साथ ही नेपाल तथा कई अन्य देशों में मनाया जाता है 

होली के इस पावन पर्व को हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली का त्यौहार पूरे भारत में प्रसिद्ध है और यह त्यौहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। 

इस पर्व को हर धर्म के लोग मनाते हैं यह त्यौहार सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में मनाया जाने लगा है दुनिया भर के लोग इस त्यौहार को मनाते हैं। 

इस त्यौहार को मनाने के पीछे प्राचीन काल की एक कहानी बहुत प्रचलित है ।कहानी कुछ इस प्रकार है हिरणकश्यप नाम का एक राजा था जो खुद को ईश्वर मानता था। 

राजा हिरण्यकश्यप ने उसके राज्य में भी पूरी प्रजा को आदेश दिया था कि कोई भी उसके राज्य में ईश्वर को ना पूजें बल्कि उसकी ही पूजा करें और उसको ही ईश्वर माने। 

परंतु राजा हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था जिसका नाम प्रहलाद था पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था वह सुबह शाम सिर्फ भगवान विष्णु का ही नाम लेता था 

यह बात उसके पिता हिरण्यकश्यप को बिल्कुल पसंद नहीं थी उसने अपने पुत्र को कई बार समझाया परंतु पुत्र पहलाद कई बार समझाने पर भी नहीं माना वह भगवान विष्णु की ही भक्ति करता रहा। एक दिन को क्रोध में आकर राजा हिरण्यकश्यप ने उनके पुत्र प्रहलाद को जान से मारने का उपाय बनाया। 

राजा हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था। होलिका के कई वर्ष तपस्या करने के पश्चात भगवान ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर होलिका को आग में न जलने का वरदान दिया। 

तभी राजा हिरणकश्यप ने पुत्र को बार-बार समझाने पर भी ना समझने पर बहन होलिका की मदद से उसे आग में जला कर जान से मारने की योजना बनाई और होलीका पुत्र प्रहलाद को अपनी गोद में बैठा कर आग में बैठ गई परंतु वरदान में मिली हुई चादर हवा के झोंके से उड़ गई और होलिका जल गई और पुत्र प्रहलाद नहीं जला।

 क्योंकि भगवान ब्रह्मा द्वारा मिली चादर होलिका को सदुपयोग के लिए दी गई थी होलिका द्वारा किए गए दुरुपयोग की वजह से होलीका उसी वक्त आग में भस्म हो गई और पुत्र पहलाद वैसा की वैसा बैठा रहा इस वजह से होली को बुराई पर अच्छाई की जीत पर मनाया जाता है इसलिए प्राचीन समय से यह परंपरा गांव व शहर में होलिका दहन कर मनाई जाती है। 

होली का त्यौहार विशेष रूप से दो दिन मनाया जाता है होली से एक दिन पहले रात में होलिका दहन होता है जिसे होलिका दहन के नाम से जानते हैं वह अगले दिन दुल्हेन्डी बनाई जाती है 

इस दिन होलिका दहन के बाद सब लोग आपस में मिलकर बेर भूलाकर एक दूसरे को गले लगाकर रंग लगाते हैं  लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, 

इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत माना जाता है और अपने पुराने कटुता और ईर्ष्या को बुलाकर एक दूसरे को रंग लगाते हैं और गले मिलते हैं 

इसके बाद शाम के समय सब नए कपड़े और मिठाईयां खाते हैं और अपने चाहने वाले  रिश्तेदारों और पड़ोसियों के घर के घर जाते हैं और उन्हें होली की शुभकामनाएं देते हैं होली त्योहार पूरे प्रदेश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है इस दिन लोग एक दूसरे को गले लगाकर  व रंग लगाते है। 

होली के दिन सभी की उर्जा देखते बनती है और होली के दिन सबसे अधिक खुश बच्चे नजर आते हैं होली से पूर्व सभी के घर में पकवान बनाए जाते हैं होली के दिन सभी मस्ती में नजर आते हैं इस पर्व को भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है होली सुख और समृद्धि का पर्व है

हमें उम्मीद है कि यह लेख जो की होली पर निबंध के ऊपर था मैं आपको जरूर अच्छा लगा होगा हमने होली पर इस निबंध को कुछ इस प्रकार लिखा है कि आपको बड़े ही आसान भाषा में यह निबंध समझ में आ जाए मुख्य रूप से यह विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर लिखा गया है जिसका उद्देश्य की विद्यार्थी इस निबंध को लिखकर अच्छे अंक प्राप्त करें

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