भूगोल (Geography) किसे कहते है: जानिए परिभाषा, महत्व, शाखाएं

हेलो दोस्तों, आज का आर्टिकल स्टूडेंट्स के लिए बहुत ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है क्योंकि आज के लेख में हम आपको भूगोल किसे कहते है, इसका अर्थ क्या है तथा इसकी कितनी शाखाये है

इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे। इसलिए आज के लेख को आप बिलकुल ध्यान से पढियेगा, ताकि एग्जाम की तयारी आप अच्छे से कर सकेंगे। 

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भूगोल Geography In Hindi

भूगोल किसे कहते है? Geography in hindi

भूगोल को अंग्रेजी में Geography कहा जाता है। ग्रीक भाषा के शब्द Geo+Grapho से मिलकर इस शब्द की उत्पत्ति हुई है।

आपको जानकारी देना चाहेंगे की Geo शब्द का अर्थ- पृथ्वी होता है और Grapho शब्द का अर्थ लिखना या वर्णन करना होता है। 

इस प्रकार यदि हम ज्योग्राफी की शाब्दिक परिभाषा देखे तो पृथ्वी का वर्णन करना ही भूगोल है अर्थात पृथ्वी और इसके ऊपर जितनी भी चीज़े है उनके बारे में लिखना। 


भूगोल की परिभाषा क्या है

’’भूगोल वह विज्ञान है जिसमे पृथ्वी तथा मनुष्य के बीच के सबंधो का अभ्यास किया जाता है।’’


भूगोल के जन्मदाता कौन है?

अरस्तु (384-322 ईसा पूर्व) को वैज्ञानिक भूगोल के जन्मदाता माना जाता हैं। अरस्तू ने अपनी सर्वप्रथम किताब ‘On The Heavens’ में यह जानकारी दी थी कि पृथ्वी गोल है।

आपको यह भी बताना चाहते है की रोमन व यूनानी विद्वानों ने पृथ्वी को चपटा या तश्तरीनुमा माना था जबकि भारतीय साहित्य में पृथ्वी को गोलाकार माना गया है।


भूगोल की शाखाये कितनी है?

भूगोल को दो भागो में विभक्त किया गया है

  1. भौतिक भूगोल (Physical geography)
  2. मानव भूगोल (Human geography)

भौतिक भूगोल किसे कहते है?

भौतिक भूगोल उसे कहते है जिसमे प्रकृति के भौतिक तथा प्राकृतिक तत्वों का निर्माण स्वयं प्रकृति द्वारा किया जाता है। इसमें मानब का हस्तक्षेप किसी भी तरह नहीं होता है।

उदाहरण के लिए स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल आदि। भौतिक भूगोल, भूगोल की बेहद ही महत्वपूर्ण शाखा है क्योंकि पर्यावरण के सभी तत्त्व इंसानो के लिए उपयोगी है। 

भौतिक भूगोल के अंतर्गत क्या क्या आता है 

भौतिक भूगोल को निम्न भागो में विस्तारित किया गया है

भू आकृति विज्ञान: इसके अंदर स्थलमंडल के भू आकृतियों के निर्माण तथा उनके मानव के साथ सबंधो को अभ्यास किया जाता है। इसे तीन क्ष्रेणी में बाटा गया है पहला   महादीप एवं महासागरीय वेसिन, दुरसा मैदान, पर्वत, पठान, झील, तीसरा पवन, जल, नदी, सागर, हिमनदी आदि। 

जल विज्ञान – जल विज्ञान में पृथ्वी के जलमंडल का अभ्यास किया जाता है। इसके अंतर्गत नदी, समुद्र, झील, हिमानियों के जैविक पहलुओं एवं जल भौतिक के और उनकी जटिलताओं की व्याख्या एवं वर्णन किया जाता है।

सागरो और महासागरों में भी कई प्रकार के संशाधन मिलते है जैसे भिन्न भिन्न प्रकार के खनिज, भोज्य पदार्थ के प्रारूप में जलीय जीव आदि।

इस शाखा के अंदर महासागर के तापमान, लवणता, जलदाब में भिन्नता, उच्चावच, समुद्री लहरें, ज्वारभाटा, सुनामी आदि का विशेष तौर पर अध्यन किया जाता है। 

खगोल शास्त्र – खगोल शास्त्र में अलग अलग प्रकार के खगोलीय पिंडो का अभ्यास करा जाता है। इसमें देखा जाता है की इन पिंडो का धरती पे और धरती पर वास करने वाले जीवो पर क्या असर पड़ता है।

भौतिक भूगोल के इस अंश के अंतर्गत प्रमुख तौर पर ब्रम्हांड के उत्पत्ति से सम्बंधित सिधान्तो, सौर्यमंडल और पृथ्वी के उत्त्पत्ति से सम्बंधित सिद्धांत आते है। 

जीवमंडल – इसके अंतर्गत अलग अलग प्रकार के जीव जंतु और अलग अलग प्रकार की वनस्पतियो को शामिल किया गया है। इसमें प्राकृतिक वनस्पतियो और पशुओ के रहने के स्थान के स्वरुप और भोगौलिक विशेषताओं की साइंटिफिक स्टडी की जाती है। 

मृदा विज्ञान – इसमें मृदा की उतपति की प्रक्रिया, इसके प्रकार तथा उनका उत्पादक स्तर, इसके अंदर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के तत्त्व, मृदा का उपयोग और वितरण  से सम्बंधित अध्यन किया जाता है। 

जलवायु विज्ञान – इसमें वायुमंडल की सरचना एवं संघटन, मौसम एवं जलवायु को प्रभावित करने वाले विभिन्न घटक जैसे (हवा, सूर्य का तप, बदाल, चक्रवात, वायुदाब, तापमान) और वायुमंडल प्रक्रियाए जैसे की वर्शन, वाष्पीकरण, संघनन, वाष्पोत्सर्जन) और जलवायु के प्रकार को समिल्लित किया जाता है। 


मानव भूगोल किसे कहते है?

यह भूगोल शास्त्र की एक मुख्य शाखा है, इसके अंतर्गत मानव पक्ष को केंद्र माना जाता है और फिर आर्थिक एवं प्राकृतिक वातावरण की स्टडी की जाती है। दरहसल मानव का प्राकृति के वातावरण से गहरा संबंध होता है। 

आपको जानकारी दे की मनुष्य एवं प्राकृतिक वातावरण के बिच परस्पर क्रिया एवं प्रतिक्रियाक के परिणाम से संस्कृत पर्यावरण का विकास उत्पन्न होता है

अर्थात संस्कृतियों की व्याख्या करने के लिए मानव एवं प्राकृतिक वातावरण दोनों भागीदार है।

जानकारी देना चाहेंगे कि मानवीय क्रियाएं तथा प्राकृतिक वातावरण की दशा दोनों ही परिवर्तनशील है फलस्वरूप इनका पारस्परिक संबंध भी परवर्तित होता है

इसलिए कहा जाता है कि मानव भूगोल, क्रियाशील मनुष्य एवं प्रकृति के परिवर्तनशील संबंधों का अभ्यास है।

मानव भूगोल के अंतर्गत क्या क्या आता है 

मानव भूगोल का विषय अत्यंत विस्तृत है इसके अध्यन में निम्न चीज़ो को शामिल किया गया है:- 

  • किसी भी प्रदेश की जनसंख्या कितनी है और उसकी क्षमता तथा मानव भूमि अनुपात है। 
  • प्रदेश के जितने भी प्राकृतिक संसाधन है उनका मूल्यांकन करना। 
  • प्रदेश में रहने वाले मनुष्य समुदाय द्वारा प्राकृतिक संसाधन (नेचरल रिसोर्स) के उपयोग से बना संस्कृतिक भु दृश्य। 
  • पर्वावरण समायोजन का वक्त के अनुसार विकास और उसकी दिशा का इतिहास।

भूगोल का उद्देश्य क्या है? 

भूगोल का उद्देश्य मनुष्य की उन्नति एवं विकास है। साथ ही मानव समाज से जुडी सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृश्यभूमि विकास के प्रयोग से होने वाली परेशानियों को हल करना के उद्देश्य से एक कदम और आगे बढ़ाया गया है।

यह कदम का मुख्य पहलु मानव समाज के कल्याण और प्रकृति की सहज अनुकूलता है। 


भूगोल के अध्यन का महत्व

पृथ्वी तल का अध्यन ही भूगोल है। यह वह शास्त्र है जिसके अंतर्गत पृथ्वी की आन्तरिक तथा बाहरी स्तिथि का अध्ययन करते हैं।

यह वह शास्त्र है जिसमे ना केवल पृथ्वी के ऊपरी स्वरूप बल्कि उसके प्राकृतिक विभागों का भी ज्ञान होता है।

इसके अतिरिक्त भूगोल के अध्ययन के दो मुख्य उपागम है जैसे क्रमबद्ध उपागम और प्रादेशिक उपागम। क्रमबद्ध उपागम की घोषणा अलेक्जेंडर वाॅन हम्बोल्ट ने की है। प्रादेशिक उपागम की घोषणा कार्ल रिटर ने की है।

ऊपर आपने जाना की भूगोल किसे कहते है। यदि आपको इससे सम्ब्नधित और कोई भी प्रश्न हो तो हमें कमेंट करके आप पूछ सकते है।

यदि आपने यह लेख को पढ़ लिया है तो हमें आशा है कि आपको भूगोल (Geography) क्या है तथा इसकी परिभाषा आदि कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर मिल गए होंगे हमने बड़े ही सरल शब्दों में इस लेख को लिखा है परीक्षा की दृष्टि से यह काफी महत्वपूर्ण है


महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर

भारतीय भूगोल का पिता किसे कहा जाता है?

जेम्स रेनेल इन्हे समुद्र विज्ञान में अग्रणी कार्य के लिए समुद्र विज्ञान का पिता के साथ साथ इन्हें भारतीय भूगोल का भी पिता कहा जाता है

भूगोल को अंग्रेजी में क्या कहते हैं?

भूगोल को अंग्रेजी में अर्थात इंग्लिश में (Geography) जियोग्राफी के नाम से जाना जाता है

वॉन थ्यूनेन कौन है और यह कहां से थे?

वॉन थ्यूनेन जर्मनी के अर्थशास्त्री तथा भूगोलवेत्ता थे

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