दुनिया के सात अजूबे और उनके नाम

इस लेख में आपको दुनिया के सात अजूबे के नाम और उनकी फोटो देखने को मिलेगी साथ ही संक्षिप्त में इनके बारे में आपको महत्वपूर्ण जानकारी भी मिलेगी समय-समय पर दुनिया में मनुष्य ने कुछ ऐसी अभूतपूर्व आकृतियां बनाई है कि जिसको आज के आधुनिक युग में आधुनिक इंजीनियरों के द्वारा इनको दोबारा बना पाना काफी ज्यादा मुश्किल है इसलिए इन्हें अजूबा भी कहा जाता है

इन अजूबों को आज भी दुनिया की सरकारों ने संजो कर रखा है यह सातों अजूबे अलग-अलग देशों में स्थित है और वहां की पहचान बने हुए हैं उदाहरण के लिए भारत के ताजमहल की बात करें तो सरकार द्वारा यहां इतनी है सख्ती है कि आप प्रदूषण करने वाले वाहन को इसके पास से नहीं निकाल सकते चलिये जानते हैं कि इन अजूबों को चुनने की प्रक्रिया किस प्रकार और किसके द्वारा शुरू हुई

दुनिया के सात अजूबे का चयन कैसे हुआ

अगर हम बात करें दुनिया के सात अजूबों के बारे में तो हम बचपन से सुनते आए हैं कि आगरा का ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक है आपको बता दे कि यह सात अजूबे 21वीं शताब्दी यानी 2000 से 2007 के बीच में चुने गए हैं स्विट्जरलैंड के न्यू सेवन वंडर्स फाउंडेशन के द्वारा दुनिया के 200 हिस्टोरिकल बिल्डिंग को लेकर एक सर्वे कराया गया और इस तरह से जाकर दुनिया के सात अजूबे का चयन किया गया यह चयन ऑनलाइन वोटिंग के जरिए कराई गई थी जिसमें दुनिया भर के लोगों को आजादी थी कि वह इन 200 बिल्डिंग्स में से किसे चुनते हैं और इस तरह दुनिया के सात अजूबे का चयन हुआ

दुनिया के सात अजूबे के नाम

  • क्राइस्ट द रिडीमर
  • चीन की दीवार
  • ताजमहल
  • पेट्रा 
  • माचू पिच्चु
  • कोलोसियम
  • चीचेन इट्ज़ा

क्राइस्ट द रिडीमर ( ब्राजील )

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क्राइस्ट द रिडीमर को दुनिया के सात अजूबे में से एक अजूबा माना जाता है यह ब्राजील के रियो डी जेनेरो में पहाड़ी के ऊपर स्थापित 130 फुट ऊंची ईसा मसीह की यह एक विशालकाय मूर्ति है यह प्रतिमा अपने 5 मीटर आधार सहित 39.6 मीटर लंबी और 30 मीटर चौड़ी है इसका वजन 635 टन है यह विश्व में अपनी तरह की सबसे ऊंची मूर्तियों में से एक है 

ईसाई धर्म के प्रतीक के रूप में यह मूर्ति रियो और ब्राजील की पहचान बनी हुई है यह मूर्ति बहुत ज्यादा मजबूत कंक्रीटो तथा सॉपस्टोन से बनाई गई है जोकि इस मूर्ति को मजबूती  प्रदान करता है इसकी निर्माण प्रक्रिया को 1922 और 1931 के मध्य किया गया था और यह प्रतिमा तिजुका फॉरेस्ट नेशनल पार्क के कोर्कोवाडो पर्वत की चोटी पर मौजूद है  

चीन की दीवार ( चीन )

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चीन की दीवार यह दीवार पत्थर और मिट्टी के मिश्रण से बनी है इसको 5वी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 16 वी शताब्दी के मध्य तक बनवाया गया था माना जाता है कि लगभग 20 लाख  से 30 लाख लोगों ने इस दीवार के निर्माण कार्य में अपना जीवन लगा दिया यह दीवार की कुल लंबाई 6400 किलोमीटर के आसपास है यह दीवार दुनिया के सात अजूबे में से एक है जो कि चीन का नाम दुनिया भर में ऊंचा करती है यह चीन की पहचान भी बन चुकी है 

यह दीवार कितनी बड़ी है और कितनी लंबी है इस बात का अंदाजा हम इसी बात से लगा सकते हैं की है दीवार इतनी लंबी और बड़ी है कि इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है यूनेस्को द्वारा सन 1987 में इसे विश्व की धरोहर का दर्जा प्राप्त हुआ

ताजमहल ( भारत )

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ऐसा कहा जाता है कि शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल को बनवाया था इसके निर्माण कार्य में लगभग 15 साल के आसपास का समय  लगा था ताजमहल को संगमरमर के पत्थरों से बनाया गया है इसमें 28 प्रकार के बेशकीमती पत्थर और रत्न जड़े गए हैं सन 1963 में ताजमहल को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर माना गया .

ताजमहल भारत के आगरा शहर के यमुना नदी के तट पर स्थित है आगरा की एक सरकारी वेबसाइट agra.nic.in के मुताबिक ताजमहल को देखने के लिए लगभग 70 लाख से अधिक पर्यटक हर साल आते हैं ताजमहल अपने भव्य खूबसूरती के लिए दुनिया के सात अजूबे में से एक है

पेट्रा ( जॉर्डन )

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पेट्रा जॉर्डन में मआन प्रांत में स्थित एक बहुत ही पुरानी और ऐतिहासिक नगरी है यह नगरी पत्थर द्वारा तराशी गई इमारतों के लिए प्रसिद्ध है ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण कार्य की शुरुआत लगभग 1200 पूर्व के आसपास हुआ होगा पेट्रा को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर की उपाधि प्राप्त है वर्तमान में पेट्रा जॉर्डन के सबसे बड़े पर्यटन स्थल में से एक बन चुका है इसके साथ ही इसे दुनिया के सात अजूबे में से एक अजूबा माना जाता है

माचू पिच्चु ( पेरू )

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माचू पिच्चू एक दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में स्थित माचू पिच्चू एक बहुत ही पुराना ऐतिहासिक स्थल है इंकाओं में इसका निर्माण अपने आधिकारिक स्थल के उपयोग के लिए किया था जोकि सन 1430 ईस्वी के आसपास था1981 में माचू पिच्चू को पेरू का ऐतिहासिक मंदिर घोषित कर दिया गया इसके निर्माण में पॉलिश किए हुए पत्थरों का प्रयोग किया गया था यह पेरू के सबसे पवित्र स्थानों में से एक स्थान माना जाता है यूनेस्को ने इसे 1983 में विश्व धरोहर का दर्जा दिया 

कोलोसियम ( इटली )

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कोलोसियम इटली देश के रोम नगर के मध्य में निर्मित विशालकाय एलिप्टिकल एंफ़ीथियेटर है यह एक बहुत विशालकाय अखाड़ा था जिसे फ्लेवियन राजवंशों के द्वारा निर्माण करवाया गया था इसमें दर्शकों की बैठने की कुल क्षमता लगभग 50,000 के आसपास थी 
उस समय के हिसाब से यह संख्या अपने आप में बहुत ज्यादा थी इसमें सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से बहुत भयानक लड़ाई हुआ करती थी 21 वी शताब्दी में कई भूकंप झटकों ने इसे खंडहर के रूप में परिवर्तित कर दिया है इन्हीं खूबियों के कारण इससे यूनेस्को द्वारा विश्व की धरोहर का दर्जा प्राप्त है इसलिए यह  2007 से दुनिया के सात अजूबे में से एक नायाब अजूबा है


चीचेन इट्ज़ा ( मेक्सिको )

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चीचेन इट्ज़ा अमेरिका में मैक्सिको के यूकाटन राज्य में स्थित है यह एक सीढ़ीदार पिरामिड है इसका निर्माण पत्थरों द्वारा किया गया था इसे कई विभिन्न डिजाइन और शैलियों से मिलकर बनाया गया था इसकी सबसे अच्छी इमारत कासा कोलोराडो है इस पिरामिड के चारों दिशाओ में आपको सीढ़ियां देखने को मिलेंगे अगर चारों दिशाओं की सीढ़ियां को मिला दिया जाए तो यह लगभग 365 सीढ़ियां होंगी  यहां पर सालाना 12 लाख  से अधिक पर्यटक हर वर्ष आते हैं 

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यदि आपने यह पूरा लेख पढ़ लिया है तो हम आशा करते हैं कि आपको दुनिया के सात अजूबे और उनके नाम पता चल गए होंगे हमने इन अजूबों के साथ एक संक्षिप्त में इनका विवरण भी दिया है ताकि अगर आप किसी कॉम्पिटिटिव परीक्षा की तैयारी कर रहे हो तो आपको यह याद रहे इसलिए हमने इस को बड़े ही आसान भाषा में आपके लिए लिखा है

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