भाषा किसे कहते हैं भाषा के प्रकार तथा परिभाषा

भाषा किसे कहते हैं अथवा भाषा क्या है ऐसे ही भाषा से जुड़े कई सारे महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर हमने इस लेख में दिया है भाषा के प्रकार तथा उसकी विशेषताएं आदि महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर इस लेख में हमने आपके साथ साझा किया है भाषा अपने आप में ही एक बहुत बड़ा विषय है हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण पाठ में से एक भाषा एक पाठ है जोकि परीक्षा की दृष्टि से बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है

भाषा किसे कहते हैं , भाषा के प्रकार तथा परिभाषा

भाषा किसे कहते हैं

भाषा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने भाव या विचार को किसी दूसरों व्यक्ति को समझाते हैं तथा दूसरों व्यक्ति के विचार अथवा भाव को खुद समझते हैं भाषा शब्द संस्कृत के भाष धातु के द्वारा बना है जिसका अर्थ होता है कहना अथवा  बोलना इसी को भाषा कहते हैं

भाषा किसी भी व्यक्ति से संपर्क साधने का या अपने विचार को आदान प्रदान करने का मुख्य माध्यम होता है भाषा के बिना मनुष्य अधूरा है सामाजिक दृष्टि से देखे तो भाषा भिन्न भिन्न प्रकार की होती है हम बचपन से जिस समाज में और देश में रह रहे हैं तो हमें अपने समाज और देश की भाषा का ज्ञान अभ्यास के कारण हो गया है लेकिन दुनिया में कई सारे देश और उनकी अलग भाषाएं है जिसे हमारे लिए समझ पाना काफी मुश्किल भरा होता है दुनिया में हजारों प्रकार की भिन्न भिन्न भाषाएं हैं

वही बात करें की दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा तो वह भाषा संस्कृत भाषा है यह दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा में से एक है माना जाता है  ईसा से 5000 साल पहले संस्कृत भाषा बोली जाती थी अकेले भारत में 121 भाषाएं बोली जाती है लेकिन उसमें से मुख्यतः भारतीय संविधान द्वारा मात्र 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है इंग्लिश एक ऐसी भाषा है जिसे दुनिया में सबसे ज्यादा संवाद के लिए प्रयोग किया जाता है यह दुनिया की सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है

प्रत्येक भाषा की एक भौगोलिक सीमा होती है उस सीमा के भीतर ही उस भाषा का उपयोग किया जाता है सीमा के बाहर देखे तो किसी दूसरी भाषा की शुरुआत हो जाती है भाषाएं भौगोलिक दृष्टि से बदलती रहती है

भाषा की परिभाषा

भाषा विचार विनियम का साधन है इसके साथ ही कोई व्यक्ति अगर चाहता है तो भाषा के माध्यम के द्वारा अपने अनुभव तथा विचारों को पुस्तक, लेख और कविता आदि के द्वारा भी व्यक्त कर सकता है 

दो मुख्य विद्वानों के अनुसार भाषा की परिभाषा 

प्लेटो के अनुसार : विचार जब ध्वन्यात्मक होकर मुख द्वारा प्रकट होते हैं या होठों पर प्रकट होते हैं उसे ही भाषा कहते हैं अर्थात आसान भाषा में कहा जाए तो प्लेटो कहते हैं कि हमारा विचार जब ध्वनि के माध्यम से होठों पर प्रकट होता है तो उसे ही भाषा कहते हैं 

स्वीट के अनुसार : ध्वन्यात्मक शब्दों द्वारा अपने विचारों को प्रकट करना भाषा कहलाता है अर्थात सरल शब्दों में हमारे या किसी और के द्वारा ध्वनि के माध्यम से जो शब्द बाहर निकलते हैं और जो विचार किसी और या हमारे द्वारा प्रकट होते हैं उसे ही भाषा कहते हैं

भाषा के रूप अथवा प्रकार

मुख्यतः भाषा तीन प्रकार की होती है मौखिक, लिखित और सांकेतिक यह तीनों प्रकार की भाषा का उपयोग हम अपनी बात को किसी दूसरे व्यक्ति को समझाने अथवा कहने के लिए करते हैं  वही मुख्य रूप से मौखिक भाषा का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है यह दूसरे भाषाओं की अपेक्षाकृत काफी सरल है यह तीनों भाषाएं परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न समय में उपयोग की जाती हैं 

मौखिक भाषा 

मुंह से बोले जाने वाली तथा कान से सुनी जाने वाली भाषा के माध्यम से जब हम अपने विचारों को व्यक्त करते हैं तो इसे ही मौखिक भाषा कहते हैं | उदाहरण के लिए जब हम टीवी में समाचार सुनते हैं तब उसमें समाचार सुनाने वाला व्यक्ति हमें मौखिक भाषा के रूप में समाचार सुनाता है 

उदाहरण : गाना सुनना, क्रिकेट मैच देखना, समाचार सुनाना और  रेडियो सुनना आदि मौखिक भाषा के उदाहरण है |

लिखित भाषा

भाषा का एक ऐसा स्वरूप जिसमें हम लिखकर अपने विचार या बातों को दूसरे व्यक्ति के समक्ष प्रकट करते हैं और वह व्यक्ति उसे पढ़कर ग्रहण करता है तो उसे ही लिखित भाषा कहते हैं 

सरल भाषा में किसी व्यक्ति को कुछ लिखकर बताना और जब वह उसे वह पढ़कर हमारी बातों को समझता है उसे ही लिखित भाषा कहते हैं

उदाहरण : खत , कहानी , कविता आदि इसके उदाहरण है

सांकेतिक भाषा

सांकेतिक भाषा वह भाषा है जिसमें हम चिन्हों के माध्यम से या फिर इशारों के माध्यम से समझते हैं उदाहरण के लिए जब हम ट्रैफिक में होते हैं तो वहां पर ट्रैफिक पुलिस सांकेतिक भाषा का उपयोग करके ही निर्देश देता है

उदाहरण : ट्रैफिक लाइट, रोड पर बने चिन्ह, इशारों द्वारा समझाना आदि सांकेतिक भाषा के उदाहरण है

भाषा का अंतिम स्वरूप

जो वस्तु बन बनाकर पूर्ण होती है उसका अंतिम स्वरूप होता है और भाषा के विषय में यह बात लागू नहीं होती है वह कभी भी पूर्ण नहीं हो सकती उसमें विकास और परिवर्तन समय अनुसार होता रहता है लंबे समय से भाषा में काफी ज्यादा परिवर्तन होते आया है इसलिए ऐसा कह पाना बहुत मुश्किल है की भाषा का कोई अंतिम स्वरूप होता है भाषा का कोई भी अंतिम स्वरूप नहीं होता है

भाषा की निम्नलिखित विशेषताएं

  • भाषा सामाजिक प्रक्रिया है
  • भाषा सर्वव्यापक है
  • भाषा अर्जित संपत्ति है
  • प्रत्येक भाषा का अपना स्वतंत्र ढांचा है
  • भाषा परंपरागत होती है

भाषा के दोष

यदि बालक अपने स्वर यंत्रों पर नियंत्रण नहीं रख पाता तो उसमें भाषा दोष उत्पन्न हो जाता है सरल शब्दों में यदि एक छोटा बच्चा कुछ बोल रहा है और उसके बोलने में कुछ त्रुटि हो जाती है अथवा कुछ गलती हो जाती है तो उसे भाषा दोष कहते हैं भाषा दोष से ग्रसित बालक समाज से पत्र आने लगते हैं उनमें हिलता की भावना का विकास हो जाता है और वह सामान्यतः अंतर्मुखी स्वभाव के हो जाते हैं भाषा दोष से शैक्षिक विकास को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है

भाषा दोष के प्रकार

इस अवस्था में व्यक्ति जिस शब्द को ठीक से समझता है लेकिन उसका उच्चारण सही से नहीं कर पाता है या फिर जल्दी नहीं कर पाता है बोलने में तोतला हट या फिर वयस्क होकर बच्चों जैसी आवाज निकलना यह सब भाषा दोष के प्रकार है

  • अस्पष्ट उच्चारण
  • तीव्र अस्पष्ट वाणी
  • तुतलाना
  • हकलाना
  • ध्वनि परिवर्तन

भाषा की विशेषताएं

भाषा पैतृक संपत्ति नहीं है अपितु यह अर्जित संपत्ति है भाषा को सीखा जाता है इसको सीखने के लिए प्रयास की आवश्यकता होती है यह धन की तरह माता-पिता से अनायास प्राप्त नहीं होती भाषा आरंभ से लेकर अंत तक सामाजिक वस्तु है भाषा की उत्पत्ति उसका प्रयोग और उसका अर्जन सब कुछ समाज में ही होता है शारीरिक, भौतिक और मानसिक रूप से तथा और भी कई कारणों से भाषा निरंतर बदलती है

इस ब्लॉग में हमने भाषा से जुड़े सारे महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर को सम्मिलित किया है भाषा किसे कहते हैं और भाषा के कितने प्रकार होते हैं तथा उसकी विशेषता आदि विषयों को इस लेख में हमने सम्मिलित किया है हम आशा करते हैं यह लेख पढ़कर आपको यह समझ में आ गया होगा कि भाषा किसे कहते हैं और भाषा के कितने प्रकार होते हैं

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