वर्ण किसे कहते हैं जाने इसके भेद और उनके उदहारण

हर देश की अपनी अलग अलग भाषा होती है। भाषा के आधार पर ही व्याकरण और ग्रामर जैसी रचनाये की गयी है ताकि व्यक्ति को भाषा को सही से सिखने में आसानी हो सके।

हिंदी व्याकरण में भी कई ऐसी चीजे है। जिन्हे जानकर आप हिंदी सीख सकते है। इस लेख में हम आपको बताएंगे वर्ण किसे कहते है?

वर्ण किसे कहते हैं जाने इसके भेद और उनके उदहारण , वर्णमाला किसे कहते हैं, वर्ण के प्रकार क्या है, वर्णों की मात्रा
वर्ण किसे कहते हैं

वर्ण किसे कहते हैं

जब कोई भाषा बोली जाती है उससे ध्वनि उत्पन्न होती है। ध्वनि के इस सबसे छोटे रूप को अलग नहीं किया जा सकता। यह ही वर्ण कहलाते है।

सरल भाषा में कहे तो इन्हे अक्षर कहा जाता है। जिन्हे तोड़ा नहीं जा सकता। वर्ण भाषा की सबसे सूक्ष्तम इकाई मानी जाती है। जैसे – ग्, क्, ई  आदि। 

इन वर्णो को जोड़कर शब्द बनाये जाते है। और जब किसी शब्द को तोडा जाता है तो उसमे उपयोग किये गए वर्णो का पता चलता है। चलिए इसे उदहारण द्वारा समझते है। जैसे – 

रक्षा  – र+अ +क्ष +आ 


वर्णमाला किसे कहते हैं

समस्त भाषाओं की अपनी अपनी अलग वर्णमाला होती है। सरल तरीके से कहा जाए तो वर्णो यानि अक्षर के दल से भाषा बनती है और वर्णो को यदि क्रमबद्ध कर दिया जाए तो वर्णमाला बनती है। 

जैसे- हिंदी भाषा में – क, ख, ग, घ के क्रमबद्ध तरीके को वर्णमाला कहा जाता है।

हिंदी भाषा के लेखन में वर्णो की संख्या 52 होती है जिसके अंतर्गत 13 स्वर तथा 35 व्यंजन और 4 संयुक्त व्यंजन बताये गए है।


वर्ण के प्रकार क्या है  

हिंदी भाषा में वर्ण के दो प्रकार है।

  1. स्वर
  2. व्यंजन

स्वर

ऐसे वर्ण जिन्हे हम बिना किसी अन्य वर्णो की मदद से कह सकते है। वह स्वर कहलाते है। स्वर उच्चारण करने के लिए स्वतंत्र होते है।

यानी इसे बोलने के लिए किसी और की सहायता की आवश्यकता नहीं होती है। हिन्दी वर्णमाला में 11 स्वर होते हैं।

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

आपको बता दे कि उपरोक्त स्वर के अतिरिक्त इन्हे भी स्वर माना गया है।   

अं, अः

स्वर के भेद 

स्वर के भेद तीन तरह के होते है। 

  1. ह्रस्व स्वर
  2. दीर्घ स्वर
  3. प्लुत स्वर

ह्रस्व स्वर – ये वह स्वर होते है जिनका उच्चारण करने में बहुत कम समय लग पाता है। यह ह्रस्व स्वर कहलाते है। गिनती में यह चार होते है -अ, इ, उ, ऋ| इन स्वरों को मूल स्वर भी कहा जाता है। 

दीर्घ स्वर – ऐसे स्वर जिनके उच्चारण करते समय ह्रस्व स्वरों की तुलना में दो गुना वक्त लग जाता है। ऐसे स्वरों को दीर्घ स्वर कहा जाता है। यह स्वर सात(7) होते है। जैसे – आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

प्लुत स्वर– वे स्वर जिन्हे बोलने में दीर्घ स्वर की तुलना में ज्यादा वक्त लगता है, प्लुत स्वर कहलाते है। जैसे – ओऽऽम्। हिंदी में इन शब्दों का उपयोग कम ही किया जाता है। 

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व्यंजन

ऐसे वर्ण जिनके उच्चारण में स्वरों की आवशयकता होती है उन्हें व्यंजन कहा जाता है। बिना स्वर की मदद से व्यंजन को नहीं बोला जा सकता है। 36 व्यंजन हिंदी वर्णमाला में बताये गए है। जैसे – 

क्   ख्   ग्   घ्   ड़्  च्    छ्   ज्   झ्  ञ्  ट्    ठ्    ड्    ढ्   ण्  त्    थ्    द्    ध्   न् प्    फ्   ब्    भ्   म्  य्    र्    ल्    व्  श्   ष्    स्    ह्  क्ष   त्र    ज्ञ    श्र

इसके अलावा ड़ ढ़ को भी व्यंजन माना गया है। 

व्यंजन के भेद

व्यजन तीन प्रकार के होते है। 

  1. स्पर्श व्यंजन
  2. अंतःस्थ व्यंजन
  3. ऊष्म व्यंजन
  4. संयुक्त व्यंजन

स्पर्श व्यंजन – वो व्यंजन जिनको बोलते समय तालु, दाँत, जीभ या फिर होंठ का स्पर्श होता है उन्हें स्पर्श व्यंजन कहा जाता है। जैसे – स्पर्श के आधार पर इन्हे पांच भागो में बांटा गया है। 

  1. क वर्ग-क, ख, ग, घ, ड़ (कण्ठ से उच्चारण होने वाले )
  2. च वर्ग – च , छ , ज , झ , ञ (तालू से उच्चारण होने वाले)
  3. ट वर्ग – ट , ठ ,ड़ ,ढ ण ( तालु से उच्चारण होने वाले)
  4. त वर्ग – त ,थ , द , ध ,न (दाँत से उच्चारण होने वाले)
  5. प वर्ग – प , फ ,ब ,भ ,म (होंठ से उच्चारण होने वाले)

अंतःस्थ व्यंजन – ऐसे व्यंजन जो कि उच्चारण के समय मुँह के अंदर ही रहते है। उस तरह के व्यंजनों को अंतःस्थ व्यंजन कहा जाता है| अंतःस्थ व्यंजन को अद्र्ध स्वर के नाम से भी जाना जाता है| ये चार होते है – य् र् ल् व्। 

ऊष्म व्यंजन – वो वर्ण जिनके उच्चारण के समय मुंह से गर्म वायु बाहर आती है। उष्म व्यंजन कहे जाते है| गर्म स्वर होने के कारण ही इन्हे उष्म व्यंजन नाम दिया गया है। ये चार होते है – श, ष, स, ह। 

संयुक्त व्यंजन – ऐसे व्यंजन जो कि दो या फिर दो से ज्यादा व्यंजन के मिलने से बनते है। यह भी चार होते है – क्ष, त्र, ज्ञ, श्र। 

उदहारण 

क्ष = क् + ष् + ह् + अ

त्र = त् + र् + अ

ज्ञ = ग् + य् + अ

श्र = श् + र् + अ


वर्णों की मात्रा

वर्णो में मात्राओ का भी इस्तेमाल किया जाता है। स्वर वर्णो को जोड़ने के लिए व्यंजन वर्ण में स्वर चिन्हो का उपयोग किया जाता है।

जहाँ भी स्वर चिन्हो को प्रयोग किया जाता है उन्हें वर्णों की मात्रा कहते है। आपको बता दे की  स्वर-चिह्नों की मात्रा सिर्फ व्यंजन वर्ण के साथ ही उपयोग की जाती है।  

वर्ण की मात्राएँ 10 होती है, इन्हे – (ा) (े) (ै) (ो) (ू) आदि रूप में यह प्रयुक्त होती है। 


वर्ण की मात्रा के भेद 

यह दो तरह की होती है। 

  1. हस्व मात्रा (लघु मात्रा)
  2. दीर्घ मात्रा (गुरु मात्रा)

हस्व मात्रा (लघु मात्रा)

क + (ि) = कि

ल  + (ु) = लु 

प + (े) = पे 

ख  + (ो) = खो 

इस तरह स्वर चिन्हो की मदद से जो व्यंजन में वर्ण की मात्रा लगी है वह लघु मात्रा कहलाती है। 

दीर्घ मात्रा (गुरु मात्रा)

प  + (ा) = पा 

क + (ी) = की

च  + (ू) = चू 

क + (ै) = कै

न  + (ौ) = नौ  इस तरह जो मात्राएँ बनती है उन्हें गुरु मात्रा कहा जाता है।


आप आप समझ गए होंगे की वर्ण किसे कहते हैं। इनके भेद क्या होते है और उन्हें उदहारण से कैसे समझा जा सकता है। इससे आपको हिंदी भाषा को अच्छे से समझने में आसानी होगी साथ ही आप हिंदी भाषा के वाक्यों को भी अच्छे से समझ सकेंगे। 

यह लेख विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी है। परीक्षाओं में भी इस पर प्रश्न आते है जिन्हे आप समझकर लिख सकते है। आशा करते है यह लेख आपके लिए मददगार होगा।  

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